Friday, July 4, 2008

मेरे मरने के बाद,-१० ( धांधली )

मेरे मरने के बाद,

मित्रो ! कल मेरे जाने के बाद के लिए लिखी गई मेरी यह क्षणिका , आज की व्यवस्थाओं को अपने इर्द-गिर्द देख कर लिखी गई है, मन कहता है, जीवन के उस पार भी कहीं यही लेन - देन तो नही होगा !!?

धांधली

यमदूत लेखा लेंगे,

यमराज धमकी देंगे॥

वहां भी देखना होगा,

क्या कुछ ! ले-देकर

बात बनानी होगी॥

कृमशः

2 comments:

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव said...

अच्छा व्यंग्य। इंतज़ार रहेगा

राकेश जैन said...

satyendra ji ! shukriya..