Wednesday, July 2, 2008

मेरे मरने के बाद,

प्रिय पाठको !!
लीजिये एक और अनुभूति आपसे बांटता हूँ,

कल का चलन ??



आधुनिकता के उस दौर में,


शायद तुम मुंडन भी न कराओ॥


तीसरे दिन,


तुम व्यवसायी होने पर,


दुकान खोलने की जल्दी मे रहोगे॥


और नौकरी पेशा होने पर,


हाफ टाइम करने की कोशिश मे॥


जैसा भी हो,


देख लेना !


सुविधा से,


अस्थि विसर्जन॥


(कृमशः)


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