Sunday, December 30, 2012

।।सादर श्रद्धांजली।।













।।सादर श्रद्धांजली।।

 
इसने-उसने

जिसने चाहा

जो चाहा

कह डाला है,

वो मौन हो गई

ज़हर पी लिया

जीवन का

अब मृत्यु ही

अंतिम हाला है।



ईश्वर ने

जो चुना अंत में

वह इंसाफ

ज़ुरूरी था

तार-2 हो,

इस दुनिया में

वरना रोज़

उधडती वो।



जो हुआ

घिनौना

एक बार तो

हर माँ-बहिना है

घायल,

हर रोज़

फब्तियां सुनती

तो फिर

कैसे सहती

वो मुश्किल।



चिर शांति के

पन्ने श्वेत

उस बिटिया

को रखो समेट,

अपने पन्ने

रखना बंद

ताकि वो न

हो शर्मिंद।








Tuesday, April 24, 2012

अखबार

अब अखबार मंगाने मे


लगता है डर...

एक रोज़ गलती से,

पड़ गया पानी,

शब्द स्याही कि जगह,

लहू बन के बह निकले..

कुछ और नहीं होता,

मौत और मौत,

बस मौत छपी होती है,

झरोखे सी कोई जगह हो

तो कोइ अबला,

इज्ज़त के लिए रोती है..

कोई छोड़ गया होता है

रोता हुआ बच्चा,

किसी माँ का तो आता ही नहीं

जो पढने गया था सुबहा.

कोई मुक्कम्मल सी बजह नहीं

कि अब अख़बार पढ़ें घर में

अब तो दिल पत्थर का हो तो

अख़बार लगे घर में..

कि ख़बर पढ़ता हूँ, तभी

बेटी को जाना होता है स्कूल,

सहम कर भेज तो देता हूँ

फिर पलटता हूँ वही ख़बरें,,

कि दुपट्टा ओढ़ के गई थी,

मगर झीना था बहुत..

फाड़ के वसन, चीर ली इज्ज़त,

अज्ञात थे कोई पता नहीं पाया,

पुलिस ने पड़ताल करी,

हाथ नहीं कुछ आया.

अब अखबार मंगाने मे

लगता है डर...

एक रोज़ गलती से,

पड़ गया पानी,

शब्द स्याही कि जगह,

लहू बन के बह निकले..

Sunday, March 18, 2012

प्रिय पत्नी स्वेता के लिए जो मुझसे दूर है... इस समय।
बड़ा बेसब्र है वो मेरी इनायतें पाने को,
वक़्त पीछे पड़ा है , उसकी ऐ कशिश आजमाने को।
वो रोता बहुत है मेरे पास आने को,
वक़्त उसे रुलाता बहुत है आजमाने को॥

मैं कहता हूँ हौसला बढाने को,
वो लड़ता है मुझसे ऐ दिलासा दिलाने को।
वो नहीं है तो सेहरा तो मेरी ज़िन्दगी भी है,
वो रो कर लगा है उसे दरिया बनाने को॥
घट रहा कुछ इस क़द्र,न देखा, न सोचा था कभी,
वक़्त के पैतरें हैं सब सबक सिखाने को।
मेरा फरमान है ज़रा चुप कर, सम्हल जा साथी,
सिर्फ आंसू तो नाकाफी हैं, यूँ दरिया बनाने को॥
आरज़ू रख,अमल में ला, कि सब खैरियत ही है,
देखना है कितना और है वक़्त बदल जाने को।
हम बने एक दूजे के लिए,है वक़्त का ही करम,
दूर रख कर भी वो, देगा कोई नूर हमे सजाने को।
हम नीड़ बसायेंगे जो साथ मिला है हम-दम,
दूरियां मिट जाएँगी बखुद, सपना ऐ सजाने को.......