Sunday, June 8, 2008

आशा के दीप


तुमने ही तो आकर मुझ तक,

आशा के दीप जलाए थे,

मेरे जीवन मे आकर,

आशा के रंग सजाये थे ..

मैं तो रह लेता था ,

अंधरे कमरे मे घुट कर,

तुम ही हाथ पकड़ कर एक दिन,

मुझको बाहर लाये थे॥

तुमने ही तो आ कर मुझ तक,

आशा के दीप जलाये थे॥

मैंने तो रोका था तुमको,

अपने घर के बाहर ही,

पर आकर अन्दर तुमने ही,

सुंदर गीत सजाये थे॥

तुमने ही तो आ कर मुझ तक ,

आशा के दीप जलाए थे॥


मैं तो रो लेता था,

अपने घुटनों पर सर रख के,

पहली बार यहाँ आकर,तुमने ही!

अश्को पर प्रतिबन्ध लगाये थे,

तुमने ही तो आ कर मुझ तक,

आशा के दीप जलाये थे॥