Friday, May 2, 2008

मैं फिर लिखना चाहता हूँ, सुन्दर कविता !!

मैं फिर लिखना चाहता हूँ,

सुन्दर कविता !!

फिर लिखने से पहले,

रुक जाता हूँ ये सोचकर-

क्या तुम फिर वापस आओगी ??

पहनोगी मेरे शब्दों के लिबास,

सुहाग की लाल साड़ी उतारकर ..

क्या sajaogi अपनी मांग मे-

मेरा शब्द सिन्दूर,

सुहाग की लाल रोली निकाल कर ॥

मेरा मन है लिखूं सुन्दर कविता,

तो क्या ! ? तुम फिर वापस आओगी ॥

kya पहनोगी मेरी धडकनों के-

jhanakte नुपुर,

अपनी सुहाग कि पायलें उतार कर॥

मेरी शब्द बाहें पड़ते ही utaarni होगी-

स्वर्ण मेखला,

सुहाग का मंगल सूत्र ॥

क्या तुम वापस आओगी !!?

पूछता है मन,क्यूंकि

में फिर लिखना चाहता हूँ,

एक सुन्दर कविता ..

4 comments:

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) said...

अति सुन्दर कविता राकेशजी

शोभा said...

राकेश जी
सुन्दर तथा भावपूर्ण कविता। पर अतीत केवल सपनों में ही लौटाया जा सकता है। शुभकामनाओं सहित

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया. लिख तो ली.

राकेश जैन said...

aap ki sarahna ke lie bahut dhanyabad