Monday, October 22, 2007

कवि

कवि स्याही नही,

जिसे बिखेरा गया है कागज़ों पर ,


कवि शब्द है,

स्याही से जिसे उकेरा गया है कागज़ों पर......राकेश

5 comments:

Manish said...

वाह ! सुंदर लगी ये पंक्तियाँ

राकेश जैन said...

thanking you Manish ji.

neetu said...

good one

Ashish said...

Nice lines dear...


bahut hi sundar aur arth-purna hai ye ...

राकेश जैन said...

aap sab ka shukria