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Monday, March 23, 2009


फूल की कहानी, जो मैंने सुनी उसने कही।

आप भी वजह फरमाएं -

शूल नहीं चुभता तुमको,

गर फूल नहीं तोडा जाता॥

और फूल एक न बचता,

गर शूल से मौका छोड़ा जाता॥

कितने हैं बदमाश सरल,

जो बात बताते हैं पूजा की,

पर मन में होता भावः विनय का,

एक फूल न तुमसे तोडा जाता॥

ये बात अलग है,

फूल स्वयं लालायित था,

प्रभु चरणों मे आने की खातिर,

तब ही तो वो शूल (सुई) सहारे ,

धागे मैं गुथ माला बन जाता॥

पर छल के पर्याय देखिये,

अपनी-अपनी श्रद्धा कह कर,

कितने फूलों को तोडा जाता॥

फूल मृदु का कहिये संयम,

जो मौन समर्पण करता जाता॥

पर शूल, साधू sam सरल जताता,

ग़लती का एहसास कराता ,

कहता माली मत बन कातिल,

प्रभु नही रखते मृत की आशा॥

और जो तू चाहे, करना गर अर्पण,

क्यूँ नहीं, नव जीवन रोपे,

एक पौधे मे फूल ugaata॥